Thursday, 19 March 2020

अस्थमा के लक्षण ,कारण और घरेलू टिप्स

अस्थमा के लक्षण ,कारण और घरेलू टिप्स 

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अस्थमा एक गंभीर बीमारी है। इसकी वजह से इंसान की जान भी जा सकती है। यह श्वास नलिकाओं को प्रभावित करता है। दरअसल श्वास नलिकाएं ही हमारे फेफड़ो से हवा को अंदर-बाहर करती हैं। अस्थमा होने पर इन नलिकाओं में सूजन आ जाती है, जिससे ये सिकुड़ जाती हैं और फेफड़ों तक पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पाती है। इसकी वजह से मरीज को सांस लेने  में दिक्कत होने लगती है। अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। अस्थमा किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों और बूढ़ों में अस्थमा होना आम बात है। मौसम में बदलाव, धूल-मिट्टी और धुंएं की जैसे कुछ विशेष परिस्थितियों में अस्थमा के अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है। 

अस्थमा के लक्षण 


जब दमा के कारक मरीज के संपर्क में आते हैं, तो शरीर में मौजूद विभिन्न रासायनिक पदार्थ (जैसे हिस्टामीन) स्रावित होते हैं। इस कारण सांस नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं। सांस नलिकाओं की भीतरी दीवार में लालिमा और सूजन आ जाती है और उनमें बलगम बनने लगता है। इन सभी से दमा के लक्षण पैदा होते हैं, जो इस प्रकार हैं।

  • खांसी जो रात में गंभीर हो जाती है।
  • सीने में कसाव या जकड़न।
  • सीने में घरघटाहट जैसी आवाज आना।
  • गले से सीटी जैसी आवाज आना।
  • बार-बार जुकाम होना।
  • सांस लेने में कठिनाई, जो दौरों के रूप में तकलीफ देती है।
  • जोर-जोर से सांस लेना, जिस कारण से थकान महसूस होना। 

अस्थमा के कारण 
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- आनुवांशिकता  के कारण आदिअस्थमा या दमा होने के कई कारण हो सकते हैं जिसमें मुख्य है वायु प्रदूषण. इस बीमारी  के कारण सांस की नली में सूजन आ जाती है या आसपास की मांशपेशियों  में कसाव होता है. जिसके कारण हवा का आवागमन अच्छे से नहीं हो पाता है.
क्या आप जानते हैं कि अस्थमा के मरीज़ों को सांस लेने से ज्यादा सांस छोड़ने में दिक्कत होती है. एलर्जी होने के कारण सांस की नली में बलगम बनने लगता है. अन्य अस्थमा होने के कारण इस प्रकार हैं:
- घर में या उसके आसपास धूल का होना
- घर में पालतू जानवर का होना
- वायु प्रदूषण
- perfumed cosmetics का इस्तेमाल करना
- सर्दी, फ्लू ब्रोंकाइटिस  और साइनसाइटिस  का संक्रमण
- ध्रूमपान
- तनाव या भय के कारण
- सर्दी के मौसम में अधिक ठंड होने के कारण
- अधिक मात्रा में जंक फूड खाने के कारण
- ज्यादा नमक खाने के कारण.

अस्थमा के लिए घरेलु टिप्स

    1. लैवेंडर ऑयल:- पांच−छह बूंदे लैवेंडर ऑयल की एक बाउल गर्म पानी में डालें और उससे करीबन पांच से दस मिनट तक स्टीम लें। आप इस उपाय को प्रतिदिन करें। लैवेंडर का तेल न सिर्फ वायुमार्ग की सूजन को कम करता है, बल्कि बलगम के उत्पादन को भी नियंत्रित करता है। जिससे आपके वायुमार्ग को आराम मिलता है और साथ ही साथ प्रतिरक्षा तंत्र भी मजबूत होता है। इस प्रकार लैवेंडर ऑयल की मदद से अस्थमा अटैक को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
    2. हल्दी:- एक गिलास पानी में एक चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर उसका सेवन करें। करीबन पंद्रह दिनों तक इस उपचार को दिन में तीन बार करें। हल्दी एक बेहतरीन एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट है। साथ ही इसमें कर्क्युमिन भी पाया जाता है, जो अस्थमा से लड़ने में मददगार है।
    3. सूखी अंजीर:-अंजीर के सूखे फल बहुत गुणकारी होते हैं। यह कफ को जमने से भी रोकते हैं। सूखी अंजीर के 4 दाने  को गर्म पानी में रातभर भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट इसे पीसकर खा लें। ऐसा करने से श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है और इससे संक्रमण से भी राहत मिलती है और अस्थमा का सफल इलाज  होता है।
    4. तेजपत्ता:- तेजपत्ता और पीपल के पत्ते की 2 ग्राम मात्रा को पीसकर मुरब्बे की चाशनी से साथ खाएं। रोजाना इसे खाने से अस्थमा की समस्या  कुछ समय में ही गायब हो जाएगी।
    5. सोंठ:- सोंठ, सेंधा नमक, जीरा, भुनी हुई हींग और तुलसी के पत्ते को पीसकर 100 मि.लीटर पानी में उबाल लें। इसे पीने से अस्थमा की समस्या दूर हो जाएगी।
    6. शहद:-श्वास संबंधी समस्याओं को दूर करने में शहद सबसे पुराना और प्राकृतिक उपचार है। इसके लिए एक गिलास गर्म पानी लेकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसका धीरे−धीरे सेवन करें। इसके अतिरिक्त रात में सोने से पहले भी एक चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर उसे चाट लें। आप शहद व पानी का सेवन दिन में तीन बार कर सकते हैं। शहद गले से कफ हटाने में  मदद करता है।
    7. कॉफी:-आपको शायद जानकर हैरानी हो लेकिन कॉफी भी अस्थमा से राहत दिलाने का एक आसान लेकिन कारगर उपाय है। इसके लिए आप एक कप गर्मागर्म कॉफी का सेवन करें। इससे आपको तुरंत अस्थमा से राहत मिलती है। दरअसल, यह तुरंत वायुमार्ग को खोलता है, जिससे आपको सांस लेने में आसानी होती है। 
    8. अदरक:-अदरक का इस्तेमाल आपने चाय में तो कई बार किया होगा, अब इसकी मदद से अस्थमा को मात दें। इसके लिए अदरक को कद्दूकस करके उसे एक कप गर्म पानी में डाल दें। अब इसे पांच मिनट के लिए यूं ही छोड़ दें। अब पानी को छान लें और इसमें शहद मिक्स करके गर्म ही पीएं।
    9. बड़ी इलायची:-बड़ी इलायची, खजूर और अंगूर को सामान मात्रा में पीसकर शहद से साथ खाएं। इसका सेवन अस्थमा के साथ पुरानी खांसी को भी दूर करता है।
    10.  पीपल के पत्ते:-पीपल के पत्तों को सूखा कर जला लें। इसके बाद इसें छान इसमें शहद मिलाएं। दिन में 3 बार इसे चाटने से अस्थमा की समस्या कुछ समय में ही दूर हो जाएगी।
    11. पालक और गाजर:-पालक और गाजर के रस को मिलाकर रोजाना पीने से भी अस्थमा की समस्या दूर होती है।
    12. आंवला पाउडर:-2 टीस्पून आंवला पाउडर में 1 टीस्पून शहद मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करें। रोजाना इसका सेवन अस्थमा को कंट्रोल करता है।
    13. मेथी के दाने :-मेथी को पानी में उबाल कर इसमें शहद और अदरक का रस मिलाकर रोजाना पीएं। इससे आपको अस्थमा की समस्या से राहतमिलेगी।
    14. लहसुन :-लहसुन, दमा के इलाज में बहुत प्रभावशाली औषधी है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे की शुरुआती अवस्था में काफी लाभ मिलता है।
    15. लौंग :-4-5 दाने लौंग लेकर एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो छान लें। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पानी पीएं। ऐसा काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार पीने से रोग नियंत्रित होता है।
    16. तुलसी :-तुलसी के 15-20 पत्ते पानी से साफ कर लें फिर उन पर काली मिर्च का पाउडर खाने से सांस की तकलीफ में राहत मिलती है।या फिर सोंठ, सेंधा नमक, जीराभुनी हुई हींग और तुलसी के पत्ते को पीसकर एक गिलास पानी में उबाल लें। इसे पीने से अस्थमा की समस्या दूर हो जाएगी।
    17. अजवाइन :-अस्थमा से अनेक लोग पीड़ित रहते हैं। अगर आप भी अस्थमा से पीड़ित हैं तो आपके लिए बहुत ही आसान उपाय है। अस्थमा का जड़ से इलाज करने के लिए आप अजवायन डालकर इसे उबालें और इस पानी से उठती भाप लें। यह अस्थमा का जड़े से इलाज (asthma ka ilaj) करता है।





            1. अस्थमा से बचाव  के उपाय (How to Prevent Asthma in Hindi)

              अस्थमा का घरेलू उपचार (Home remedies for Asthma) के लिए मरीजों को कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।
              • दमा के मरीज को बारिश और सर्दी और धूल भरी जगह से बचना चाहिए। बारिश के मौसम में नमी के बढ़ने से संक्रमण बढ़ने की संभावना होती है।
              • ज्यादा ठण्डे और ज्यादा नमी वाले वातावरण में नहीं रहना चाहिए, इससे अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।
              • घर से बाहर निकलने पर मास्क लगा कर निकलें।
              • सर्दी के मौसम में धुंध में जाने से बचें।
              • ताजा पेंट, कीटनाशक, स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की  कॉइल का धुआँ, खुशबुदार इत्र से जितना हो सके बचे।
              • धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों से दूर रहें।
              • इसके अलावा जीवनशैली और आहार में बदलाव लाने पर इन दमा के प्रभाव को कम किया जा सकता है-

            2. ऐसा हो आहार 

              • गेहूँ,  मूँग, कुल्थी, जौ, पटोल का सेवन करें।
              • अस्थमा के मरीजों को आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए। पालक औरगाजर का रस अस्थमा में काफी फायदेमंद होता है।
              • आहार में लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को जरूर शामिल करें, यह अस्थमा से लड़ने में मदद करते हैं।
              • गुनगुने पानी का सेवन करने से अस्थमा के इलाज में मदद मिलती है।
              • शहद का सेवन करें।
            3. अस्थमा रोगियों के लिए परहेज 
              • मछली, गरिष्ठ भोजन, तले हुए पदार्थ न खाएँ।
              • अधिक मीठा, ठण्डा पानी, दही का सेवन न करें।
              • अस्थमा के रोगियों को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए।
              • कोल्ड ड्रिंक, ठण्डा पानी और ठण्डी प्रकृति वाले आहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।
              • अण्डे, मछली और मांस जैसी चीजें अस्थमा में हानिकारक है।

            दांत में कीड़ा लगने के कारण ,लक्षण और घरेलू टिप्स

             दांत में कीड़ा  लगने के कारण ,लक्षण और घरेलू टिप्स  
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            दांतों में कीड़ा लगना 


            दांतों में कीड़ा लगना एक आम समस्या है दांतों में कीड़ों की वजह से दर्द होता है और आपको खाने-पीने में बड़ी परेशानी होती है. इसका मतलब है कि आप अपने मुंह की सफाई ठीक से नहीं करते हैं. आमतौर पर ये समस्या बच्चों को होती है मगर बड़ों को भी कई बार ये समस्या हो जाती है. इसका इलाज अगर ठीक समय से न किया जाए तो ये कीड़े दांतों को खोखला कर देते हैं, जिससे दांत कमजोर हो जाते हैं और जल्दी गिर जाते हैं. दांतों की नियमित सफाई न करने से दांतों के बीच में अन्न कण फंसे रहते हैं और इन्हीं अन्न कणों के सड़ने की वजह से दांतों में कीड़े लग जाते हैं। जिससे दांतों की जड़े कमजोर हो जाती है। इसी कारण दांत खोखले हो जाते हैं, मसूड़े ढीले पड़ जाते हैं तथा दांत टूटकर गिरने लगते हैं। दांतों की नियमित सफाई करने से इस समस्या से बचा जा सकता है

            दांत में कीड़ा लगने के कारण 

            • रात को सोने से पहले दांतो की सफाई न करने के कारण।
            • पान, मसाला, तंबाकू का सेवन करने से दांतों में कीड़ें लग जाते  है।
            • जब हमारे शरीर में कैल्शियम , मैग्नीशियम, विटामिन सी और विटामिन डी की कमी हो जाती है। जिसके कारण दांत कमजोर हो जाते है।
            • दांतो की साफ सफाई अच्छे से न करने से जैसे कि ब्रश न करने से
            • खाना खाने के बाद ठीक ढंग से कुल्ला न करने से
            • ज्यादा मीठा खाने से
            • रात को मीठा खाने के बाद ठीक ढंग से कुल्ला न करने से
            • तेज मसालेदार और फ़ास्ट फ़ूड का अधिक सेवन करने से
            • ज्यादा गर्म चीजे खाने से
            • पौष्टिक आहार न लेना
            दाँत में कीड़ा लगने के लक्षण
            • दांतों में दर्द जो बिना किसी कारण के हो 
            • दांतों में झनझनाहट होना 
            • मीठा ,गरम या ठंडा खाते  या पीते समय हल्के से या तेज दर्द होना 
            • दांतों में छेद और गड्डे दिखाई  देना 
            • दांतों की सतह पर काले ,भूरे और सफ़ेद रंग के दाग दिखाई देना 
            • खाना चबाते वक़्त दर्द  होना 

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            दांतों में कीड़ा लगना 

            दाँतों से कीड़ा निकालने के घरेलू उपाय


            दाँतों से कीड़ा निकालने के  कई उपाय है जिनकी मदद से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते है। ये उपाय पूरी तरह सुरक्षित है जिनके कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है। तो आइये जानते है दांतो से कीड़ा भगाने के घरेलु उपचार।
            • जायफल - जायफल का इस्तेमाल आमतौर पर मसालों के रुप में किया जाता है लेकिन यह औषधि भी मानी जाती है। इसका इस्तेमाल कर आसानी से आप कीड़े से निजात पा सकते है।जायफल का ऑयल का इस्तेमाल कर आप  इस समस्या से निजात पा सकते है। इसके लिए एक कॉटन बॉल में थोड़ा सा जायफल ऑयल डाले और इसे कीड़े वाले दांत या मसूड़ो में रखें। कम से कम 5 मिनट रखा रहने दें। इसमें आपको झनझनाहट होगी। इसे होने दें। 5 मिनट बाद कॉटन को हटा दें। यह कीड़े को जड़ से खत्म करता है। जब आप अपने दांत साफ करेंगे, तो उसके साथ कीड़ा भी निकल जाएगा। 
            • फिटकरी - दांतो की बदबू खत्म करने का आसान उपाय है फिटकरी का कुल्ला करना। ये बहुत ही अच्छा माना जाता है। इसका प्रयोग हफ्ते में एक बार जरूर करें।
            • बरगद - दांतो के लिए बरगद से निकलने वाला दूध भी काम का होता है। यह दांतो के कीड़े और होने वाले दर्द को खत्म करता है।
            • प्याज़ - प्राकृतिक रूप से दांतों के कीड़े हटाने के लिए आप प्याज़  का उपयोग कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि  प्याज़ के रस में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। इन गुणों के कारण प्याज़ मुंह में मौजूद बैक्टीरिया  को प्रभावी रूप से दूर करने में मदद करती है। जिनके परिणामस्वरूप  आपको दांतों में दर्द और सड़न जैसी समस्या नहीं  होती है। इस तरह से आप अपने दांतों की देखभाल करने के लिए प्याज़ के रस का उपयोग कर सकते हैं। जानकारों  ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्याज़ के रस का उपयोग करने पर दांत दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।
            • नमक का पानीपानी में नमक घोलकर कुल्ला   करने से आप अपने दांतों को सड़ने से बचा सकते हैं। क्योंकि   नमकयुक्त्त  पानी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जिसके कारण यह मुंह में मौजूद खराब बैक्टीरिया को नष्ट  करने में सहायक होते हैं।
            • अदरक - अदरक में एंटीऑक्सीडेंट , एंटीबैक्टीरियल  और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। इन गुणों के कारण अदरक का उपयोग दांतों की सभी समस्याओं को दूर करने में किया जा सकता है। अदरक में मौजूद सक्रिय घटक के रूप में अदरकोन, शोगोल और जिंजरोल आदि शामिल होते हैं।
            • पुदीना तेल - पुदीना आपके दांतों की समस्याओं को भी दूर कर सकता है।पुदीना मुंह में बैक्टेरिया को पूरी तरह से खत्म करने के अलावा दांतों और जीभ की गंदगी को भी दूर करता है, जिसके कारण सांसों में भी ताजगी बनी रहती है। पुदीने में मेंथोल नामक एक सक्रिय घटक होता है जिसमें  एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। ये गुण स्वाभाविक रूप से दांतों के दर्द से छुटकारा दिलाते हैं।  दांत में लगे कीड़े को निकालने के लिए पुदीने के तेल के अलावा इसकी पत्तियों को पीस कर निकाले गए रस का उपयोग कर सकते हैं।
            •  हींगयदि आपके दांत में कीड़ा लगने से उसमे बहुत दर्द हो रहा है तो आप हींग  का प्रयोग कर सकते है। इसके लिए आपको सबसे पहले थोड़ी सी हींग लेकर उसमे थोडा सा निम्बू का या मौसम्बी का रस डालकर इस मिश्रण को जिस दांत में दर्द हो रहा है उसमे लगाए।इसके अलावा  एक गिलास  पानी में दो चुटकी हींग और चार चुटकी सेंधा नमक डालकर उबाल लें. अब इस पानी को हल्का गुनगुना होने दें.गुनगुना होने के बाद इस पानी से कई बार कुल्ला कीजिए. कुल्ला करने के दौरान पानी को मुंह में 2-3 मिनट तक भरकर रखिए. इससे  आपको दांतो के कीड़ों से राहत मिल जाएगी.
            •  काली मिर्चकाली मिर्च को पीसकर पाउडर बनाएं। काली मिर्च के पाउडर में थोडा नमक मिलाकर दर्द वाली जगह पर मंजन करें, थोड़ी देर में राहत महसूस होगी।
            • नींबूनींबू विटामिन सी का सबसे अच्छा स्त्रोत होता है, इसलिए जब भी दांत में दर्द हो तो दर्द वाली जगह पर नींबू का कतरा लगाने से कुछ ही देर में दर्द ठीक हो जाता है।
            • नीम - नीम में ढेर सारे औषधीय गुण होते हैं. इसके एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण नीम को बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणुओं का दुश्मन समझा जाता है. दांतों में कीड़े लग गए हैं तो नीम की पतली टहनी या छाल से दातुन करने से ये कीड़े खत्म हो जाते हैं.इससे दांत मजबूत बनते हैं और दांतों का दर्द भी आसानी से ठीक हो जाता है. इसके अलावा नीम से दातुन करने से सांसों की दुर्गंध से भी राहत मिलती है.
            • सरसों का तेल - दांतो में कीड़ा लगने पर आप नमक, हल्दी और सरसों के तेल का इस्तेमाल करके भी आप अपने दांतो को कीडे से बचा सकते हो। इसके लिए आप इन तीनों चीजों को आपस में मिलाकर ब्रश  की तरह प्रयोग करें। आपको निश्चित रूप से फायदा होगा।इसके अलावा दांत में  कीड़े लगने पर दो चुटकी सेंधा नमक में तीन-चार बूंद सरसों का तेल डालकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को कीड़े वाले दांत के नीचे दबाएं.इससे दांतों के दर्द में राहत मिलेगी और कीड़े मर जाएंगे. अगर आप रोजाना सरसों और सेंधा नमक के इस पेस्ट से मंजन करते हैं तो आपको दांतों से संबंधित रोग कभी भी नहीं होंगे
            •  लहसुन - लहसुन में बहुत सारे गुण होते हैं. ये एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-बायोटिक गुणों से भरपूर होता है. इसके अलावा लहसुन दर्द से भी राहत दिलाता है. दांतों में कीड़ा लग जाने पर लहसुन की 1-2 कली को उसी दांत से चबाएं जिसमें कीड़े लगे हों.इसके रस से कीड़े मर जाएंगे और दर्द ठीक हो जाएगा. आप चाहें तो लहसुन को पीसकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर भी दांत में लगा सकते हैं.
            • लौंग - आयुर्वेद में लौंग के बहुत सारे फायदे बताए गए हैं. दांतों से जुड़े हर मर्ज की दवा है लौंग. दांतों में कीड़ों की समस्या है तो 2-3 लौंग को बारीक पीस लें और फिर इसके पाउडर को कीड़े लगे दांतों पर छिड़क लें या दांतों में इसके चूर्ण को दबा लें. अब मुंह को बंद कर लें और लार बनने दें.इस लार को मुंह में 5 मिनट तक रोके रखें फिर उगल कर नार्मल पानी या गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें. इसके अलावा लौंग के तेल में रूई भिगोकर  कीड़े वाले दांत पर लगाने से भी कीड़े खत्म हो जाते हैं.

            • दांतों में कीड़ा लगने से बचाने के लिए

                                        • खाने में मीठी वस्तुओं का कम से कम प्रयोग करें.
                                        • नियमित दो बार ब्रश करें.
                                        • ब्रश सही तरीके से और मुलायम ब्रश से करें.
                                        • हर छह महीने में दन्त चिकित्सक से परामर्श लें. यदि स्केलिंग की ज़रूरत लगे तो स्केलिंग करवाएं.
                                        • रेशेदार भोजन करें
                                        • खाना खाने के बाद ठीक ढंग से कुल्ला जरूर करें। खाना खाते समय हमारे दांतो में खाने के कुछ कण रह जाते हैं अगर इनको समय पर ना निकाला जाये तो यह दांतो में कीड़े को जन्म देते हैं जिससे दांत खोखले  हो जाते हैं। इसलिए खाना खाने के बाद कुल्ला करें। रोजाना ब्रश करें।
                                        • दांतों के बीच फ्लॉस करें.
                                        • जीभ साफ़ रखें.
                                        • गुटखा, पान आदि का सेवन न करें.
                                        • मंजन के बाद मसूढ़ों की मालिश करें.
                                        • ब्रश, फ्लॉस, कुल्ला, मालिश शीशे में देख कर करें जिस से गलत पद्धति न इस्तेमाल हो.
                                        • नीम के दातुन का प्रयोग करें, टूथब्रश इस्तेमाल करने से पहले उसे गर्म पानी से अच्छे से धो लें।
                                        • कुछ भी चीज गर्म खाने के बाद ज्यादा ठंडी चीज ना खाये यह दांतो को कमजोर बनाती है।
                                        • दांतो की बदबू हटाने के लिए फिटकरी के पानी से कुल्ला करें।

                                                                Monday, 16 March 2020

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                                                                माइग्रेन के कारण ,लक्षण और घरेलु टिप्स  

                                                                माइग्रेन के मरीज दुनियाभर में बढ़ते जा रहे हैं।  हमारा  देश भी अछूता नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण भागदौड़ की जिंदगी को माना जाता है। यह जिंदगी तनाव से भरपूर है, और लोग इसे बदलने का अधिक प्रयास भी नहीं करते। धीरे-धीरे यही सब माइग्रेन के रुप में बदलने लगती हैं। सामान्य स्थिति से तनाव भरे माहौल में पहुंचने पर सिरदर्द बढ़ जाता है और ब्लडप्रेशर हाई होने लगता है। लगातार ऐसी स्थितियां अगर आपके सामने पेश आएं, तो समझिए आप माइग्रेन के शिकार हो रहे हैं।

                                                                माइग्रेन क्या है?

                                                                आमतौर पर लोग सिर में होने वाले किसी भी किस्म के दर्द को माइग्रेन मान लेते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि माइग्रेन और सामान्य सिर दर्द अलग- अलग हैं। सिर में होने वाले सामान्य दर्द की वजह भी अलग  होती है। यह थकान, भूख लगने, नींद न आने जैसे कारणों से होता है।  यह दर्द अस्थाई होता है, जो थोड़ी देर में ठीक भी हो जाता है। सामान्य सिर दर्द में सिर के दोनों हिस्सों में आंखों के आसपास दर्द होता है, जबकि माइग्रेन में सिर के पिछले हिस्से में या फिर सिर के आधे हिस्से में दर्द होता है। यह कतई जरूरी नहीं है कि आपके सिर में होने वाला दर्द माइग्रेन का ही हो।  आपको माइग्रेन होने पर आपके सिर के एक हिस्से में बहुत ज्यादा दर्द होने लगता है और ऐसा लगने लगता है जैसे कोई हथौड़े से मार रहा हो। यह दर्द सिर के आधे हिस्से में होता है, लेकिन कभी-कभी यह पूरे हिस्से में भी हो सकता है। दर्द की यह स्थिति कुछ घंटों से लेकर कुछ दिन तक रह सकती है। इस दर्द को माइग्रेन, अधकपारी या अर्धशीशी कहते हैं। माइग्रेन में सिर दर्द के समय सिर के नीचे की धमनी बढ़ जाती है। कई बार दर्द वाले हिस्से में सूजन भी आ जाती है। माइग्रेन को वस्कुलर हेडेक के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेदिक डॉक्टरों की मानें तो माइग्रेन दिमाग या चेहरे की रक्त-वाहिनियों में हुई गड़बड़ी से होने वाली बीमारी है। माइग्रेन आनुवंशिक बीमारी भी है, जिसका कारण खान-पान, वातावरण में बदलाव, तनाव के स्तर में बढ़ोतरी या जरूरत से ज्यादा सोना हो सकता है। 

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                                                                माइग्रेन के लक्षण 

                                                                • चेहरे या गर्दन में दर्द।
                                                                • चक्कर आना 
                                                                • धुंधली दृष्टि या विकृत दृष्टि।
                                                                • नाक बंद।
                                                                • सिर हमेशा फड़फड़ाता  रहना।
                                                                • जिन्हें माइग्रेन की समस्या होती है। उन्हें आंखो में दर्द, मतली या फिर उल्टी की समस्या होती है।
                                                                • लाइट, आवाज़  से भी समस्या होना।
                                                                • दिनभर बेवजह उबासी आना।
                                                                • माइग्रेसन पीड़ित लोगों को ऑरा(Aura)का महसूस होना। इसमें आपके सवेंदना में कमी या फिर  सुई चुभना जैसा महसूस होना।
                                                                • नींद अच्छे से न आना।
                                                                • माइग्रेन में मूड पलभर में बदल जाता है। कभी उदास तो कभी बहुत खुश।
                                                                • माइग्रेन होने से पहले खाने का अधिक मन होना।
                                                                • बार-बार पेशाब आना।
                                                                • सुबह उठते ही सिर पर तेज दर्द होना यह साधारण या तीव्र दर्द, जो सिर के एक या दोनों ओर हो सकता है
                                                                • शारीरिक श्रम करने से दर्द बढ जाना
                                                                • दर्द दैनिक क्रियाओं में अवरोध पैदा कर सकता है
                                                                • माइग्रेन आपका पाचन खराब कर सकता है।
                                                                • कुछ लोगों में माइग्रेन के दौरान ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।
                                                                • इसका दर्द 4 से 72 घंटों तक रह सकता है।
                                                                • कुछ लोगों को महीने में कई बार सिरदर्द हो सकता है, जबकि अन्य लोगों को इससे कम होता है।


                                                                                    • माइग्रेन के कारण 

                                                                                  • एलर्जी , तेज रोशनी, तेज सुगंध, तेज आवाज, धुआं, व्रत, ऐल्कोहल, इसके अलावा मछली, मूंगफली, खट्टे फल और अचार के सेवन से भी यह दर्द हो सकता है। 
                                                                                  •  रजोनिवृत्ति या प्रेगनेंसी के दौरान कई महिलाओं में तीव्र माइग्रेन विकसित करने की प्रवृत्ति होती है।इसके अलावा महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, बर्थ कंट्रोल पिल्स ,हॉर्मोनल चेंज भी माइग्रेन का कारण बनते हैं | 
                                                                                  • पर्याप्त पानी न पीना
                                                                                  • तनाव के कारण
                                                                                  • दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण 
                                                                                  • बहुत ज्यादा सोने के कारण
                                                                                  • जरूरत से कम सोने के कारण
                                                                                  • वातावरण में अचानक परिवर्तन के कारण
                                                                                  • बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत के कारण
                                                                                  • कैफीन वाले पदार्थों का ज्यादा सेवन करने से
                                                                                  • नाश्ता और खाना छोड़ देने से
                                                                                  •  तंबाकू, धूम्रपान, चॉकलेट आदि का ज्यादा सेवन करने से


                                                                                  माइग्रेन  के घरेलु टिप्स

                                                                                    1. बंद गोभी को पीसकर इस पेस्ट को एक सूती कपडे में ठीक ढंग से बिछाकर माथे में बांधें। और जब पेस्ट सूखने लगे तो नया पेस्ट बनाकर पट्टी बांधें। इससे आपको सरदर्द से काफी फायदा मिलेगा।
                                                                                    2. माथे में नींबू के छिलके का पेस्ट बना कर बांधें काफी आराम मिलेगा।
                                                                                    3. गाय का शुद्ध ताजा घी सुबह-शाम दो-चार बूंद नाक में रुई से टपकाने से माइग्रेन से काफी राहत मिलेगी।
                                                                                    4. गाजर का रस और पालक के रस को मिलाकर पीए। इससे आपको फायदा मिलेगा।
                                                                                    5. तुलसी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर खाने के पहले या खाने का बाद सेवन करने से माइग्रेन में काफी लाभ होगा।
                                                                                    6. अपने खाने में हरी सब्जियों और फ़लों को अधिक मात्रा में शामिल करें।
                                                                                    7. माइग्रेन से अगर सिर में ज्यादा दर्द हो रहा है तो तुरंत लौंग पाउडर और नमक मिलाकर दूध के साथ पिएं. ऐसा करने से सिर का दर्द गायब हो जाएगा. लौंग हमारे लिए बहुत फायदेमंद है.
                                                                                    8. माइग्रेन के लिए 1 चम्मच अदरक का रस और शहद को मिक्स करके पीएं. माइग्रेन के दर्द को दूर करने के लिए आप अदरक का टुकड़ा भी मुंह में रख सकते हैं. अदरक का किसी भी रूप में सेवन माइग्रेन में राहत दिलाता है.
                                                                                    9. सिर को ठंडक देने से माइग्रेन में राहत मिलती है। ठंडक के लिए आप माथे  पर बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी रख सकते हैं। साथ ही सिर में मेहंदी लगाना भी फायदेमंद रहता है। ऐसा करने से रक्त  धमनियां फैलकर अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती हैं।
                                                                                    10. जिस व्यक्ति  को माइग्रेन की समस्या  है, उसे पर्याप्त  नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए। नींद लेने से माइग्रेन में आराम मिलता है। अच्छी  नींद लेने में योग, मेडिटेशन और मार्निंग वॉक भी सहायक होती है।
                                                                                    11. सिर की मसाज करें।इसके लिए  तिल के तेल में एक टुकड़ा दालचीनी और 1-2 इलायची डालकर गर्म कर लें। इस तेल से मालिश करें।मालिश के लिए पहली 2 उंगलियों से हल्के हाथ से गोल-गोल घुमाकर सिर की मसाज  करें। सिर के बीच, दोनों भौंहों के बीच और आंखों के कोनों पर स्थित प्रेशर पॉइंट्स को भी दबाएं।  मालिश दर्द के सिग्नल दिमाग तक पहुंचने में रुकावट पैदा करती है। इससे सिरोटोनिन बढ़ता है, जो दर्द कम करने में मदद करता है। 
                                                                                    12. पिपरमिंट में सूजन को कम करने के गुण होते है। साथ ही, यह शांत और स्थिरता का भाव भी पैदा करता है। आप पिपरमिंट चाय पी सकते हैं या फिर पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदें एक चम्मच शहद के साथ आधे गिलास पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं। पिपरमिंट ऑयल से सिर और माथे पर 20-25 मिनट मालिश करने से भी फायदा होता है।
                                                                                    13. ऐपल साइडर विनेगर यानी सेब का सिरका माइग्रेन में राहत दिलाता है। एक गिलास पानी में एक छोटा चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद डालकर पिएं। करीब 30 दिन लगातार पीने से राहत मिलेगी। जब माइग्रेन हो या लगे कि होने वाला है तो 2-3 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर लें। यह शरीर को साफ करने, शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल, वजन कम करने के अलावा हड्डियों और जोड़ों के दर्द में भी राहत दिलाता है। सेब का सिरका नहीं है तो आप सेब भी खा सकते हैं। ग्रीन ऐपल को सूंघना भी फायदेमंद हो सकता है।
                                                                                    14.  रोज 10 से 12 बादाम खाएं। यह माइग्रेन का बढिया उपचार है।
                                                                                    15. रोज सुबह-शाम एक गिलास अंगूर का रस पीयें। यह काफी कारगार उपाय है

                                                                                                   माइग्रेन से बचने के लिए क्या करें 

                                                                                                  • माइग्रेन से बचने के लिए सिरदर्द उत्पन्न करने वाले कारणों से बचना चाहिए, जैसे ऊंची आवाज में गाने सुनना, तनावग्रस्त रहना आदि.
                                                                                                  • दर्दनिवारक दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए.
                                                                                                  • संतुलित दिनचर्या का पालन करना चाहिए.
                                                                                                  •  समय पर सोना व जागना  चाहिए.
                                                                                                  • नियमित रूप से व्यायाम  करना चाहिए.
                                                                                                  •  बहुत ज्यादा देर तक भूखे नहीं रहना चाहिए.
                                                                                                  • तापमान में तेज बदलाव से बचें। मसलन एसी से एकदम गर्मी में न निकलें या फिर तेज गर्मी से आकर बहुत ठंडा पानी न पिएं। 
                                                                                                  • सूरज की सीधी रोशनी से बचें। अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो छाता लेकर और सन ग्लासेज पहनकर निकलें। 
                                                                                                  • गर्मी के मौसम में कम-से-कम ट्रैवलिंग करें। 
                                                                                                  • गर्मी और उमस से बचने के लिए ठंडी जगह (एसी) में रहें। 
                                                                                                  • दिन में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं, वरना डिहाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन माइग्रेन का प्रमुख सामान्य कारक होता है। इसलिए डिहाइड्रेशन से बचें। शरीर में पानी रहेगा तो माइग्रेन के चांस कम होंगे। 
                                                                                                  • बरसात के मौसम में जब उमस बहुत ज्यादा होती है, हमें वैसी चीजों को खाने-पीने से बचना चाहिए जिससे पसीना ज्यादा निकलता है, जैसे कि चाय-कॉफी आदि। 
                                                                                                  •  मिर्च न खाएं। 
                                                                                                  •  ब्लड प्रेशर मेंटेन रखें।
                                                                                                  •  गर्भनिरोधक गोलियां लेने से बचें। अगर लेना ही है तो कम डोज लें। असल में, ऑरल पिल्स में प्रोजेस्टेरॉन (progesterone) की मात्रा ज्यादा होती है जो हॉर्मोन को असंतुलित कर देती है। इससे माइग्रेन होने के चांस बढ़ जाते हैं।
                                                                                                  • सुबह सूरज निकलने से पहले वॉक पर जाएं। नंगे पांव घास पर चलें। इससे तनाव कम होता है। तनाव कम होता है तो हॉर्मोंस भी बैलेंस हो जाते हैं। इन सब वजहों से माइग्रेन कम हो जाता है।
                                                                                                  • रोजाना 30 मिनट योगासन और प्राणायाम जरूर करें। इससे काफी फायदा होता है। मेटिडेशन भी कारगर है, चाहे रोज 10 मिनट ही करें। 

                                                                                                  ऐसी हो डाइट

                                                                                                  • माइग्रेन के मरीजों को खूब सारा लिक्विड यानी जैसे कि सूप, नीबू पानी, नारियल पानी, छाछ, लस्सी आदि पीना चाहिए।
                                                                                                  • फल और हरी सब्जियां खूब खाएं।
                                                                                                  • कम मात्रा में नमक लें। दिन भर में आधा छोटा चम्मच नमक काफी है क्योंकि ज्यादातर फूड आइटम्स में खुद ही नमक होता है।
                                                                                                  • चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक आदि लेने से बचें। इन्हें लेने से माइग्रेन बढ़ सकता है।
                                                                                                  • ऐल्कोहल और चॉकेलट के सेवन से भी बचें। इनसे भी सिरदर्द होता है।
                                                                                                  • बेहद तेल-मसाले वाला खाना और उपवास भी माइग्रेन की परेशानी बढ़ाते हैं इसलिए इससे बचें।
                                                                                                  • कुछ तरह के चीज, बहुत ज्यादा नमक वाला खाना और प्रोसेस्ड मीट खाने से भी माइग्रेन बढ़ सकता है।
                                                                                                  • प्रोसेस्ड, डिब्बाबंद और खमीर वाले (पिज़्ज़ा , बर्गर, कुकीज, भटूरे आदि) फूड आइटम्स  से बचें। 











                                                                                                1. Wednesday, 16 October 2019

                                                                                                  पेट में गैस बनने के कारण, लक्षण और घरेलु टिप्स

                                                                                                  stomach pain,ayurved samadhan,pet ki gas ka ilaj,gas pain,stomach bloating,gas and bloating,पेट में गैस बनने की दवा,पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय,गैस भगाने के घरेलू उपाय,पेट में गैस बनने के कारण और उपाय,पेट में गैस बनना घरेलू उपाय,पेट में गैस क्यों बनती है,बॉडी में गैस क्यों बनती है,पेट में गैस बनने की दवा बताइए,how to get rid of gas home remedy,gas relief medicine,gas pain symptoms,trapped gas symptoms,how to relieve gas pain
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                                                                                                  पेट में गैस बनने के कारण, लक्षण और घरेलु टिप्स 

                                                                                                  पेट में गैस बनना एक आम समस्या है। कल का खान-पान ऐसा हो गया है कि पेट में गैस बनना, एसिडिटी जैसी बीमारियां आम हो गई हैं।अगर किसी दिन पेट में गैस बन जाए, तो खाना-पीना और काम करना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों को तो गैस का दर्द इतना परेशान करता है कि उनके लिए सांस तक लेना कठिन हो जाता है। गैस के चलते पेट में भारीपन व दर्द, आंखों में जलन, उल्टी आने का अहसास होना और सिर में दर्द तक होता है। कहने को तो यह सिर्फ गैस भर होती है, लेकिन इसे अनदेखा करने पर कई गंभीर परिणाम तक भुगतने पड़ सकते हैं। कब्ज, एसिडिटी व अल्सर आदि गैस से होने वाले रोग हैं।
                                                                                                  stomach pain,ayurved samadhan,pet ki gas ka ilaj,gas pain,stomach bloating,gas and bloating,पेट में गैस बनने की दवा,पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय,गैस भगाने के घरेलू उपाय,पेट में गैस बनने के कारण और उपाय,पेट में गैस बनना घरेलू उपाय,पेट में गैस क्यों बनती है,बॉडी में गैस क्यों बनती है,पेट में गैस बनने की दवा बताइए,how to get rid of gas home remedy,gas relief medicine,gas pain symptoms,trapped gas symptoms,how to relieve gas pain
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                                                                                                  विडियो देखने के लिये यहाँ पर क्लिक करें https://youtu.be/rDbCuZRecxs?t=3

                                                                                                  पेट की गैस की समस्या क्या होती है 


                                                                                                  पेट में अंदरूनी परत होती है, जिसे म्यूकोसा कहते हैं। इसी परत में कई छोटी-छोटी ग्रंथियां होती हैं, जो भोजन को हजम करने के लिए स्टमक एसिड और पेप्सिन नामक एंजाइम का निर्माण करती है। जहां, स्टमक एसिड भोजन को पचाता है, वहीं पेप्सिन प्रोटीन को हजम करता है। जब इसी अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है, तो पेट में गैस की समस्या होने लगती है। इस कारण स्टमक एसिड और पेप्सिन का उत्पादन कम होने लगता है और पेट खराब हो जाता है
                                                                                                  stomach pain,ayurved samadhan,pet ki gas ka ilaj,gas pain,stomach bloating,gas and bloating,पेट में गैस बनने की दवा,पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय,गैस भगाने के घरेलू उपाय,पेट में गैस बनने के कारण और उपाय,पेट में गैस बनना घरेलू उपाय,पेट में गैस क्यों बनती है,बॉडी में गैस क्यों बनती है,पेट में गैस बनने की दवा बताइए,how to get rid of gas home remedy,gas relief medicine,gas pain symptoms,trapped gas symptoms,how to relieve gas pain
                                                                                                  पेट में गैस बनने के कारण, लक्षण और घरेलु टिप्स 



                                                                                                  पेट में गैस बनने के कारण



                                                                                                  • पेट में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक संक्रमण होने से
                                                                                                  • पर्निशस एनीमिया जैसे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के कारण
                                                                                                  • पेट में बाइल एसिड के जमा होने पर
                                                                                                  • कोकीन की लत लगने पर
                                                                                                  • गैस का कारण बनने वाले भोजन का सेवन करने से
                                                                                                  • ज्यादा मात्रा में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाने से
                                                                                                  • प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने पर वायरल संक्रमण, जैसे साइटोमेगालोवायरस और हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के कारण
                                                                                                  • अधिक तनाव लेने से
                                                                                                  • दूध व दूध के उत्पादों को पचा पाने में असमर्थ होने पर
                                                                                                  • आंतों में सूजन या जलन होने पर
                                                                                                  • कब्ज होना 
                                                                                                  • पानी कम पीना और खाना खाने के बीच में पानी पीना 
                                                                                                  • ज्यादा खट्टा, तीखा, मसाले वाला खाना खाने से 
                                                                                                  • बहुत देर तक एक ही जगह पर बैठे रहने से 
                                                                                                  • देर रात तक जागना 
                                                                                                  • एस्प्रिन, इबुप्रोफेन और नेपरोक्सन जैसी दवाओं के सेवन से
                                                                                                  • अधिक शराब व चाय-कॉफी पीने से
                                                                                                  • कोल्ड ड्रिंक पीना और ज्यादा खाना खाने से गैस की समस्या हो जाती है 
                                                                                                  • विडियो देखने के लिये यहाँ पर क्लिक करें https://youtu.be/rDbCuZRecxs?t=3

                                                                                                  पेट में गैस बनने के लक्षण 

                                                                                                  • भूख न लगना 
                                                                                                  • पेट फूलना 
                                                                                                  • उल्टी ,बदहजमी और दस्त होना 
                                                                                                  • बदबूदार साँसॅ  आना और पेट में सूजन रहना 
                                                                                                  • सीने  व पेट में जलन होना 
                                                                                                  • कब्ज़ होना 
                                                                                                  • चक्कर आना 
                                                                                                  • पेट ,पीठ, सीने और सिरदर्द होना 
                                                                                                  • लगातार हिचकी आना 
                                                                                                  • पेट में ऐंठन होना
                                                                                                  • कभी-कभी बुखार  आना
                                                                                                  • मल का रंग बदलना या फिर उसके साथ खून आना
                                                                                                  • बार-बार गैस बनना
                                                                                                  • गैस निकलने पर बदूब आना
                                                                                                  • पेट में तेज़ दर्द होना
                                                                                                  • डकारें आना 
                                                                                                  stomach pain,ayurved samadhan,pet ki gas ka ilaj,gas pain,stomach bloating,gas and bloating,पेट में गैस बनने की दवा,पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय,गैस भगाने के घरेलू उपाय,पेट में गैस बनने के कारण और उपाय,पेट में गैस बनना घरेलू उपाय,पेट में गैस क्यों बनती है,बॉडी में गैस क्यों बनती है,पेट में गैस बनने की दवा बताइए,how to get rid of gas home remedy,gas relief medicine,gas pain symptoms,trapped gas symptoms,how to relieve gas pain
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                                                                                                  पेट में गैस की समस्या दूर करने के घरेलु टिप्स 


                                                                                                  1. अजवायन के चूर्ण को गर्म पानी के साथ खाएं, इससे गैस, बदहजमी से आराम मिलता है। 
                                                                                                  2. रोज़ 2 - 3 छोटी हरड़ मुंह में डालकर चूसते रहें, इससे आपको फायदा होगा
                                                                                                  3. मेथीदाना और गुड़ को पानी में डालकर उबाल लें और इस पानी को छानकर पी लें, इससे गैस में आराम मिलेगा। (जिन लोगों का शरीर कमज़ोर हो, चक्कर आते हों या गर्म तासीर वाली चीज़ें हजम न होती हों वे मेथीदाना का इस्तेमाल न करें)
                                                                                                  4. आधा चम्मच हरड़ में आधा चम्मच सोंठ का पाउडर व थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ खाएं, इससे आपको फायदा होगा।
                                                                                                  5. नींबू का रस व अदरक एक - एक चम्मच लें, फिर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाएं और इसे खाने के बाद खाएं, इससे पाचन शक्ति अच्छी होती है और गैस की समस्या भी दूर होती है।
                                                                                                  6. भुनी हींग व काला नमक मिलाकर गर्म पानी के साथ खाएं, आराम होगा।
                                                                                                  7. दो चुटकी पिसी हुई हल्दी में 2 चुटकी नमक मिलाकर गर्म पानी के साथ पिएं।
                                                                                                  8.  घरेलू उपचार आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आपको  कभी भी गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं आएगी इसके लिए आपको नींबू और पानी की जरूरत है नींबू को बीच से काटकर   पानी में नींबू की 10 से 15 बूँदे  डालें और फिर उसे अच्छे तरीके से मिला ले, नींबू के रस को आप रोजाना  सुबह खाली पेट इसका इस्तेमाल करें ऐसा करने से आपके पेट के अंदर गैस बनना बंद हो जाती  है और आपका पेट हमेशा साफ रहता है इसके साथ-साथ यह आपके पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है तो आप इसे जरूर अपनाएं|
                                                                                                  9. थोड़े से पानी में खाने वाला  सोडा, नींबू और नमक मिलाकर पीने से पेट में अफारा खत्म होता है और गैस बनना बंद हो जाती है।
                                                                                                  10. लहसुन और अदरक के रस को मिलाकर हल्के  गर्म पानी के साथ पी लीजिये । पेट में गैस बननी बंद हो जाएगी और पेट हल्का  महसूस करेगा
                                                                                                  11.  पंसारी की दुकान से शुद्ध हींग लाकर उसे पीस ले और उसे थोड़ी सी रुई पर रखकर नाभि पर रखे और लेट जाएं। इससे पेट के दर्द मे आराम होगा और गैस भी खत्म होगी
                                                                                                  12. एक चम्मच अजवाइन में एक चौथाई चम्मच नींबू के रस को मिलाकर चाटने से गैस की समस्या का निदान होता है। 
                                                                                                  13. मूली के जूस में काला नमक और हींग मिलाकर पिएं।
                                                                                                  14.  ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं, इससे पेट साफ होगा और गैस नहीं बनेगी। 
                                                                                                  15. प्याज के रस में काला नमक और हींग पीसकर व मिलाकर पीने से पेट की गैस और गैस का दर्द ठीक हो जाता है |
                                                                                                  16.  सेब के सिरके की दो चम्मच गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से गैस में तुरंत राहत मिल जाती है। 
                                                                                                  17. छाछ में चुटकी भर भुना जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर खाना खाने के बाद पीने से गैस की समस्या आमतौर पर नहीं उभरती।
                                                                                                  18. नीबू के रस में 1 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर सुबह के वक्त खाली पेट पिएं।
                                                                                                  19.  काली मिर्च का सेवन करने पर पेट में हाजमे की समस्या दूर हो जाती है। आप दूध में काली मिर्च मिलाकर भी पी सकते हैं।
                                                                                                  20.  छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर पीने से भी गैस की समस्या में काफी लाभ मिलता है।
                                                                                                  21. दिनभर में दो से तीन बार इलायची का सेवन पाचन क्रिया में सहायक होता है और गैस की समस्या नहीं होने देता।
                                                                                                  22.  रोज अदरक का टुकड़ा चबाने से भी पेट की गैस में लाभ होता है।
                                                                                                  23. पुदीने की पत्तियों को उबाल कर पीने से गैस से निजात मिलती है।
                                                                                                  24. रोजाना नारियल पानी सेवन करना गैस का फायदेमंद उपचार है।
                                                                                                  25. दालचीनी को पानी मे उबालकर, ठंडा कर लें और सुबह खाली पेट पिएं। इसमें शहद मिलाकर भी  पिया जा सकता है। 
                                                                                                  26. पेट की गैस में लहसुन बहुत फायदेमंद होता है इसके लिए रोज सुबह खाली पेट दो लहसुन की कलियाँ पानी के साथ खा लें इससे पेट की गैस की समस्या ख़त्म हो जाएगी 
                                                                                                  27. आठ से दस  किशमिश  रात को पानी में भिगो दें सुबह इन भीगी हुई किशमिश को घी में भून लें और इसमें काली मिर्च और काला  नमक डालकर रोज खाली पेट खाएं इससे पेट की गैस की समस्या से निजात मिल जाएगी 
                                                                                                  28. इस सभी उपचार के अलावा सप्ताह में एक दिन उपवास रखने से भी पेट साफ रहता है और गैस की समस्या पैदा नहीं होती।

                                                                                                  विडियो देखने के लिये यहाँ पर क्लिक करें https://youtu.be/rDbCuZRecxs?t=3
                                                                                                  stomach pain,ayurved samadhan,pet ki gas ka ilaj,gas pain,stomach bloating,gas and bloating,पेट में गैस बनने की दवा,पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय,गैस भगाने के घरेलू उपाय,पेट में गैस बनने के कारण और उपाय,पेट में गैस बनना घरेलू उपाय,पेट में गैस क्यों बनती है,बॉडी में गैस क्यों बनती है,पेट में गैस बनने की दवा बताइए,how to get rid of gas home remedy,gas relief medicine,gas pain symptoms,trapped gas symptoms,how to relieve gas pain
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                                                                                                  गैस की समस्या से बचने के उपाय 

                                                                                                  गैस से छुटकारा पाने के लिए ऊपर बताए गए घरेलू उपचार के साथ-साथ कुछ जरूरी नियमों का पालन करना भी जरूरी है। अगर आप इन उपायों को नियमित रूप से करते हैं, तो गैस की समस्या आपको कभी नहीं होगी।
                                                                                                  तली और मिर्च-मसाले वाली चीजें खाने से पेट में जलन होती है और गैस बनने लगती है। इसलिए, ऐसे खाद्य पदार्थों से दूरी बना कर रखें।

                                                                                                  • जंक फूड से दूरी बनाकर रखें।
                                                                                                  • आप प्रतिदिन कम से कम आठ-दस गिलास पानी जरूर पिएं। इससे पाचन तंत्र अच्छी तरह काम करता है और कब्ज की समस्या नहीं होती। पेट साफ होने पर हमारी आंतें अच्छी तरह काम करती हैं, जिससे गैस और एसिडिटी का सामना नहीं करना पड़ता।
                                                                                                  • शराब, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बिल्कुल न करें। ये हमारे पाचन तंत्र को खराब करते हैं, जिससे गैस और एसिडिटी होती है। साथ ही इनके सेवन से किडनी व फेफड़ों पर भी बुरा असर पड़ता है।
                                                                                                    • चाय-कॉफी का सेवन कम से कम करें। इनकी तासीर गर्म होती है, जिस कारण पेट में जलन होती है।
                                                                                                    • साथ ही सुबह की सैर और रात को खाने के बाद कुछ देर टहलें जरूर। इससे पाचन तंत्र अच्छा रहता है और भोजन आसानी से पच जाता है।
                                                                                                      • रात के खाने और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर जरूर रखें।
                                                                                                      • प्रतिदिन कम से कम 20-25 मिनट योगासन जरूर करें
                                                                                                      • आप पवनमुक्तासन, तितली आसन, पादहस्तान, नौकासन व सूर्य नमस्कार आदि कर सकते हैं। ये सभी न सिर्फ गैस की समस्या को दूर करते हैं, बल्कि वजन को संतुलित रखते हैं।
                                                                                                      • देखा जाए तो गैस इतनी बड़ी समस्या नहीं है कि उससे निपटा न जा सके। बस आपको स्वस्थ दिनचर्या का पालन करते हुए डाइट को संतुलित रखना है, नियमित रूप से व्यायाम व योग करना है। 
                                                                                                    • विडियो देखने के लिये यहाँ पर क्लिक करें https://youtu.be/rDbCuZRecxs?t=3

                                                                                                    अस्थमा के लक्षण ,कारण और घरेलू टिप्स

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